Monday, March 25, 2019

आसमान का शिकारी MiG-21

MiG-21 AKA "Fishbed" Source: tomswallpapers.com

"इसने सबसे ज्यादा युद्ध लड़े। 
दुनिया के हर संघर्ष को देखा। 
मोर्चे पर हमेशा सबसे आगे रहा।"

"युद्ध और शांति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। शांति को बनाए रखने के लिए युद्ध करना पड़ता हैं। युद्ध में शूरवीरों को किसी अस्त्र-शस्त्र के बल पर ही विजय मिलती हैं। चाहे वह भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र हो या अर्जुन का धनुष। आधुनिक युद्ध की विजय और पराजय में वायु शक्ति की मुख्य भूमिका रही हैं। बीसवीं सदी के युद्ध में हवाई शस्त्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसा ही एक शस्त्र हैं, मिग-21"

MiG-21, जिसे इसके दुश्मन "फ़िशबेड" कहते हैं, एक सुपरसोनिक जेट फाइटर और इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट है यह सोवियत यूनियन का हथियार हैं, जिसे 1950 के दशक में मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया था। इसने 1956 में पहली उड़ान भरी और 1959 में सेवा में प्रवेश किया। सोवियत यूनियन ने 1985 तक लगभग 10,645 MiG-21 का निर्माण किया और बाद में इसका उत्पादन बंद कर दिया। भारत ने इसके 657 यूनिट बनाए। वही चेकोस्लोवाकिया 194 बनाये। चीन ने इसका एक स्वदेशी निर्माण J-7/F-7 बनाया हैं। चीन ने ऐसे करीब 2400 से ज्यादा एयरक्राफ्ट बनाये हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद किसी भी दूसरे एयरक्राफ्ट के मुकाबले इसका अधिक बार निर्माण किया गया। MiG-21 के सारे वैरिएंट को मिलाकर यह 12000 से भी अधिक हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण यह काफी सस्ता था।
MiG-21 का डेल्टा विंग डिजाइन इसे माक 2 (ध्वनि से दो गुना तेज) की रफ़्तार देता हैं, जो इसे एक घातक फाइटर एयरक्राफ्ट बनाता हैं। यह काफी छोटा और हल्का एयरक्राफ्ट हैं। शुरुआत में इसके शस्त्रों में सिर्फ तोप और रॉकेट ही शामिल थे। पीढ़ी दर पीढ़ी इनमें सुधार हुआ और गाइडेड मिसाइल, स्मार्ट बम तथा आधुनिक रडार भी लगाए गए। इसकी शस्त्र प्रणाली, कम्युनिकेशन सिस्टम और एवियोनिक्स में काफी सुधार हुआ। इसे ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन द्वार गाइड किया जाता हैं।

MiG-21 की योग्यता इसके पायलट के निपुणता और कौशल पर निर्भर हैं।

भारत ने 1963 में मिग -21 को शामिल किया और पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) तथा देश में एयरक्राफ्ट निर्माण करने का लाइसेंस प्राप्त किया। यह दूसरी पीढ़ी (Second-Generation) का एयरक्राफ्ट हैंयह भारतीय वायु सेना का पहला सुपरसोनिक फाइटर एयरक्राफ्ट है। भारत ने अभी भी इसके उन्नत वैरिएंट का संचालन जारी रखा हैं। हालांकि कई दशकों से यह विवादों में रहा। 1963-2015 तक MiG-21 के 210 से ज्यादा हादसें हुए। इन हादसों में 180 से ज्यादा पायलटों और 40 से ज्यादा नागरिकों की मौत हुई। इसके बाद MiG-21 को "फ्लाइंग कॉफिन" और "विडो मेकर" भी कहा जाने लगा। भारतीय वायुसेना के पास अभी भी लगभग 120 MiG-21 सेवा में है।

MiG-21 ने कई अभियानों में अपना लोहा मनवाया हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

लिबरेशन ऑफ बांग्लादेश
MiG-21 एक ऐसा एयरक्राफ्ट हैं, जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ और भारत एशिया में एक महाशक्ति बनके उभरा.

1947 में पाकिस्तान बनने के बाद पूर्वी पाकिस्तान में बंगालियों पर अत्याचार होने लगे थे। लाखों की संख्या में शरणार्थि भारत की तरफ भागने लगे। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी का निष्कर्ष था, कि लाखों शरणार्थियों को पनाह देने के बजाय पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उतरना किफायती होगा। सरकार के पास सूचना थी कि पाकिस्तान, भारत पर हमला करने वाला हैं। यदि पाकिस्तान हमला नही करता, तब भी भारत 4, दिसंबर 1971 को पाकिस्तान पर हमला करने की तैयारी में था। 3, दिसंबर 1971 की शाम 17:30 पर पाकिस्तान ने इजराइल के "ऑपरेशन फोकस" की तर्ज पर "ऑपरेशन चंगेज़ खान" शुरू किया और पाक वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट ने भारत के पठानकोट, अमृतसर, अम्बाला, आगरा, सिरसा, उत्तरलाई, जैसलमेर, जोधपुर, और जामनगर के एयरफोर्स बेस और रडार स्टेशनों पर जबरदस्त बमबारी की। पाकिस्तानी कमांडरों का मानना था कि इससे भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट हो जाएगा, लेकिन ऐसा नही हुआ। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने युद्ध का ऐलान कर दिया और वायुसेना ने तुरंत इसका मुँहतोड़ जवाब देते हुए, रात 21:00 पर भारतीय फाइटर एयरक्राफ्ट ने पाकिस्तान कई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। इस मिशन में भारतीय वायुसेना के MiG-21FL के छह स्क्वाड्रन हिस्सा ले रहे थे। MiG-21 हवाई सुरक्षा के साथ साथ दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी, दूसरे एयरक्राफ्ट को कवर करना, दुश्मन के एयरक्राफ्ट को अपनी तरफ लुभाना, आदि काम कर रहे थे। इस युद्ध में MiG-21 का सामना F-104 स्टारफाइटर, F-6s, F-86 सेबर, C-130 हरक्यूलिस जैसे एयरक्राफ्ट से हुआ।
MiG-21 इस युद्ध (लिबरेशन ऑफ बाँग्लादेश) में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा था। 
14 दिसंबर की सुबह, इंटेलिजेंस ने एक संदेश इंटरसेप्ट किया, कि पूर्वी पाकिस्तान में गवर्नमेंट हाउस में नागरिक प्रशासन की एक उच्च-स्तरीय मीटिंग होने वाली हैं। तभी कमांड ने हमला करने का निर्णय लिया। इस मिशन को अंजाम तक पहुँचाने के लिए चार MiG-21 एयरक्राफ्ट ने ढाका की ओर कूच किया। गवर्नर हाउस का पता लगाने के लिए उन्होंने एक पुराने टुरिस्ट मैप का सहारा लिया। आखिरकार वह गवर्नर हाउस ढूढ़ने में कामयाब हो गए, जहाँ मीटिंग चल रही थी। बिना वक्त गवाए MiG-21 के पायलट ने गवर्नर हाउस पर रॉकेट से हमला शुरू कर दिया। इस हमले के तुरंत बाद गवर्नर ए एम मालिक ने इस्तीफा दे दिया। 16 दिसंबर को पाकिस्तान ने अपने लगभग 93000 से ज्यादा सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इस तरह, MiG-21 ने "लिबरेशन ऑफ बांग्लादेश" एक अहम भूमिका निभाई।

वियतनाम युद्ध
वियतनाम युद्ध (Vietnam War) 1 नवंबर, 1955 से लेकर 30 अप्रेल, 1975 के दौरान वियतनाम, लाओस और कंबोडिया में लड़ा गया था. यह युद्ध नॉर्थ वियतनाम और साउथ वियतनाम के बीच लड़ा गया था. यह साम्यवाद (Communism) और पूँजीवाद (Capitalism) के बीच अस्तित्व की लड़ाई थी. करीब 20 सालों तक चले इस युद्ध में 30 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. नॉर्थ वियतनाम को सोवियत यूनियन, चीन, नॉर्थ कोरिया और दुसरे कम्युनिस्ट राष्ट्रों से सहयोग मिल रहा था, दूसरी तरफ साउथ वियतनाम को अमेरिका, थाईलैंड जैसे कम्युनिस्ट विरोधी राष्ट्रों का समर्थन  प्राप्त था. इसमें सबसे मुख्य था अमेरिका, जिसने 1965 में अपनी सेना वियतनाम में भेजी और शुरू हुई एक खूनी जंग..... 

अमेरिका इस युद्ध में अपने 5 लाख से ज्यादा सैनिक उतार चुका था और हवाई युद्ध को प्रमुखता दी थी। 2 मार्च 1965 को अमेरिका ने  "ऑपरेशन रोलिंग थंडर" अभियान चलाया और नॉर्थ विएतनाम के चुने हुए ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी शुरू कर दी। नॉर्थ वियतनाम वायुसेना ने इस हमले के खिलाफ "आसमान में गुरिल्ला जंग" छेड़ दी। MiG-21 ने इसमे एक अहम भूमिका निभाई। वियतनामी वायुसेना के MiG-21 फाइटर "हिट एन रन" रणनीति का उपयोग कर, अमरीकियों को मात दे रहे थे। उन्होंने अनगिनत अमरीकी F-4 फैंटम, F-105 थंडरचीफ़ जैसे एयरक्राफ्ट को मार गिराया, जो की MiG-21 से कही ज्यादा महँगे और एडवांस थे। पूरे नॉर्थ विएतनाम के आसमान में MiG-21 का आतंक था। अमेरिकी वायुसेना ने MiG-21 के इस आतंक को खत्म करने के लिए "ऑपरेशन बोलो" चलाया। जिसका कई MiG-21 शिकार हुए।
30 अप्रैल, 1975 की सुबह नॉर्थ विएतनाम की सेना ने साइगॉन पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही इस युद्ध का अंत हो गया। अमेरिका अपने लगभग 58000 से ज्यादा सैनिक खोकर यह युद्ध हार चुका था।

अरब देशों के लगभग हर युद्ध में इसने दुश्मन को काँटे की टक्कर दी। सोविएत-अफगान युद्ध में इसका बड़े पैमानें पर उपयोग हुआ। तालिबान ने इसका उपयोग गृह युद्ध में अपने विरोधियों पर जमकर किया।

ऑपरेशन डायमंड
MiG-21 की श्रेष्टता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं, कि इजराइल ने इसे हासिल करने के लिए एक ख़ुफ़िया अभियान चलाया था।
1960 के दशक के मध्य में, MiG-21 का इस्तेमाल इजिप्ट, सीरिया और इराकी वायु सेना द्वारा मिडल ईस्ट के संघर्षों में बड़े पैमाने पर किया गया था, खासकर इजरायल बलों के खिलाफ। इजराइल MiG-21 की क्षमता और कमजोरी का विश्लेषण करने के लिए काफी समय से इसे हासिल करने की फ़िराक में था। ताकि इसरायली वायुसेना इसपर सामरिक लाभ प्राप्त कर सके। सोविएत यूनियन MiG-21 को अपने किसी भी दुश्मन को नही देना चाहता था। इजरायल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी "मोसाद" को एक गुप्त योजना "ऑपरेशन डायमंड" सौंपा गया था। जिसका उद्देश्य MiG-21 को हासिल करना था या यू कहे इसे "चुराना" था। मोसाद ने कई बार कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा। तभी उन्हें एक इराक़ी पायलट मुनीर रेडफा के बारे में पता चला, जो एक ईसाई था। रेडफा इस बात से नाराज़ था कि उसकी ईसाई जड़ो ने सेना में उसकी तरक्की को रोक के रखा हैं। वह इस बात से भी नाराज था कि उसे इराक़ी कुर्द के लोगों पर हमला करने का आदेश दिया गया था। मोसाद के एजेंट ने उससे संपर्क किया और उसे 1 मिलियन अमरीकी डॉलर, इजराइल की नागरिकता, नौकरी पेशकश की गई। रेडफा की शर्त थी कि इराक में उसके सारे रिश्तेदारों को किसी तरह बाहर निकाला जाए। मोसाद ने यह शर्त मान ली और रेडफा के साथ मिलकर मिग को चुराने की योजना बनाई। 16, अगस्त 1966 को रेडफा ने जॉर्डन के हवाई क्षेत्र से होते हुए, अपने MiG-21F-13 को इजराइल के हैटज़ोर एयरफील्ड पर सुरक्षित रूप से उतारा। इसके बाद इसरायली पायलटों ने MiG-21 को अपने मिराज 3 के साथ एक डॉग फाइट में अभ्यास किया। उन्होंने पाया कि मिग एक बेहतर हाई एल्टीट्यूड वाला फाइटर एयरक्राफ्ट था और उड़ान भरने में आसान था। लेकिन उन्होंने यह भी देखा की मिग को डॉग फाइट में सिर्फ कुशल और निपुण पायलट ही जीत दिला सकते हैं। उन्हें मिग की कई कमजोरियों का पता चला। इसरायली वायुसेना ने इसका फायदा उठाया और युद्घ में कई मिग को मार गिराया। बाद में इजराइल ने इसे अमेरिका को सौंप दिया।

26, सितंबर 2025 को MiG-21 ने अंतिम उड़ान भरी और भारतीय वायुसेना से इसे सेवानिवृत्त कर दिया गया।