Saturday, October 8, 2022

Fake Loan App Fraud

फेक लोन एप के द्वारा धोखाधड़ी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है, कि लोग इससे अनजान हैं। जागरूकता और सावधानी लोगों को डिजिटल धोखाधड़ी के हमले से बचा सकती है।

इन सब धोखाधड़ी से बचने के कुछ उपाय नीचे दिए हुए हैं।

✓ कोई भी अनजान लोन एप अपने फ़ोन में इंस्टॉल न करें।

✓ यदि आप कोई अनजान ऐप इंस्टॉल कर रहे हैं, तब कैमरा, कॉन्टैक्ट्स, फाइल्स और मीडिया, कॉल लॉग्स आदि की अनुमति न दें। इनके अनुमति देने से संदिग्ध आपके फ़ोन से निजी जानकारी हैक कर लेते हैं।

✓ किसी भी एप से लोन लेने से पहले किसी जानकार व्यक्ति से एक बार इसकी सलाह अवश्य लें।

✓ यदि आप एक पीड़ित हैं और जालसाज आपको धमका रहे हैं या ब्लैकमेल कर रहे हैं और जबरन पैसों की मांग कर रहे हैं, तब घबराए नहीं। वह आपके डर का उपयोग एक हथियार के रूप में आपके खिलाफ करेंगे। पहले आप अपने नज़दीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराए।

✓ यह जालसाज कंप्यूटर द्वारा आपकी बदली हुई नग्न तस्वीर आपके रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजेंगे। आपके साथ क्या हुआ हैं? यह उन्हें बताने में किसी तरह का संकोच न करें।

"आपका साहस ही आपकी समस्या का समाधान हैं।"

Fraud cases are increasing day by day through Fake Loan App. The biggest reason for this is that, People are unaware of it. Awareness and precaution can protect people from the onslaught of digital lending fraud.

Below are some ways to avoid these frauds.

✓ Don't install any unknown loan app on your device.

✓ If you are installing an unknown app, Do not allow permission like Camera, Contacts, Files and Media, Call Logs etc. By allowing them, fraudsters hack your phone's personal data.

✓ Before applying for a loan from an unknown loan app, consult a knowledgeable person.

✓ If you are a victim and fraudsters are threatening or blackmailing you and extorting money, don't panic. They will use your 'Fear' as a weapon against you. File a complaint at the nearest Police Station.

✓ The fraudsters will send your nude morphed pictures to your relatives and friends. Don't hesitate and tell them what happened to you.

"Courage is the solution to your problem."

Thanks,
Deepak Jaiswar

Monday, March 25, 2019

आसमान का शिकारी MiG-21

MiG-21 AKA "Fishbed" Source: tomswallpapers.com

"इसने सबसे ज्यादा युद्ध लड़े। 
दुनिया के हर संघर्ष को देखा। 
मोर्चे पर हमेशा सबसे आगे रहा।"

"युद्ध और शांति एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। शांति को बनाए रखने के लिए युद्ध करना पड़ता हैं। युद्ध में शूरवीरों को किसी अस्त्र-शस्त्र के बल पर ही विजय मिलती हैं। चाहे वह भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र हो या अर्जुन का धनुष। आधुनिक युद्ध की विजय और पराजय में वायु शक्ति की मुख्य भूमिका रही हैं। बीसवीं सदी के युद्ध में हवाई शस्त्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसा ही एक शस्त्र हैं, मिग-21"

MiG-21, जिसे इसके दुश्मन "फ़िशबेड" कहते हैं, एक सुपरसोनिक जेट फाइटर और इंटरसेप्टर एयरक्राफ्ट है यह सोवियत यूनियन का हथियार हैं, जिसे 1950 के दशक में मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया था। इसने 1956 में पहली उड़ान भरी और 1959 में सेवा में प्रवेश किया। सोवियत यूनियन ने 1985 तक लगभग 10,645 MiG-21 का निर्माण किया और बाद में इसका उत्पादन बंद कर दिया। भारत ने इसके 657 यूनिट बनाए। वही चेकोस्लोवाकिया 194 बनाये। चीन ने इसका एक स्वदेशी निर्माण J-7/F-7 बनाया हैं। चीन ने ऐसे करीब 2400 से ज्यादा एयरक्राफ्ट बनाये हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद किसी भी दूसरे एयरक्राफ्ट के मुकाबले इसका अधिक बार निर्माण किया गया। MiG-21 के सारे वैरिएंट को मिलाकर यह 12000 से भी अधिक हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण यह काफी सस्ता था।
MiG-21 का डेल्टा विंग डिजाइन इसे माक 2 (ध्वनि से दो गुना तेज) की रफ़्तार देता हैं, जो इसे एक घातक फाइटर एयरक्राफ्ट बनाता हैं। यह काफी छोटा और हल्का एयरक्राफ्ट हैं। शुरुआत में इसके शस्त्रों में सिर्फ तोप और रॉकेट ही शामिल थे। पीढ़ी दर पीढ़ी इनमें सुधार हुआ और गाइडेड मिसाइल, स्मार्ट बम तथा आधुनिक रडार भी लगाए गए। इसकी शस्त्र प्रणाली, कम्युनिकेशन सिस्टम और एवियोनिक्स में काफी सुधार हुआ। इसे ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन द्वार गाइड किया जाता हैं।

MiG-21 की योग्यता इसके पायलट के निपुणता और कौशल पर निर्भर हैं।

भारत ने 1963 में मिग -21 को शामिल किया और पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) तथा देश में एयरक्राफ्ट निर्माण करने का लाइसेंस प्राप्त किया। यह दूसरी पीढ़ी (Second-Generation) का एयरक्राफ्ट हैंयह भारतीय वायु सेना का पहला सुपरसोनिक फाइटर एयरक्राफ्ट है। भारत ने अभी भी इसके उन्नत वैरिएंट का संचालन जारी रखा हैं। हालांकि कई दशकों से यह विवादों में रहा। 1963-2015 तक MiG-21 के 210 से ज्यादा हादसें हुए। इन हादसों में 180 से ज्यादा पायलटों और 40 से ज्यादा नागरिकों की मौत हुई। इसके बाद MiG-21 को "फ्लाइंग कॉफिन" और "विडो मेकर" भी कहा जाने लगा। भारतीय वायुसेना के पास अभी भी लगभग 120 MiG-21 सेवा में है।

MiG-21 ने कई अभियानों में अपना लोहा मनवाया हैं। इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

लिबरेशन ऑफ बांग्लादेश
MiG-21 एक ऐसा एयरक्राफ्ट हैं, जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का जन्म हुआ और भारत एशिया में एक महाशक्ति बनके उभरा.

1947 में पाकिस्तान बनने के बाद पूर्वी पाकिस्तान में बंगालियों पर अत्याचार होने लगे थे। लाखों की संख्या में शरणार्थि भारत की तरफ भागने लगे। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी का निष्कर्ष था, कि लाखों शरणार्थियों को पनाह देने के बजाय पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उतरना किफायती होगा। सरकार के पास सूचना थी कि पाकिस्तान, भारत पर हमला करने वाला हैं। यदि पाकिस्तान हमला नही करता, तब भी भारत 4, दिसंबर 1971 को पाकिस्तान पर हमला करने की तैयारी में था। 3, दिसंबर 1971 की शाम 17:30 पर पाकिस्तान ने इजराइल के "ऑपरेशन फोकस" की तर्ज पर "ऑपरेशन चंगेज़ खान" शुरू किया और पाक वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट ने भारत के पठानकोट, अमृतसर, अम्बाला, आगरा, सिरसा, उत्तरलाई, जैसलमेर, जोधपुर, और जामनगर के एयरफोर्स बेस और रडार स्टेशनों पर जबरदस्त बमबारी की। पाकिस्तानी कमांडरों का मानना था कि इससे भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट हो जाएगा, लेकिन ऐसा नही हुआ। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने युद्ध का ऐलान कर दिया और वायुसेना ने तुरंत इसका मुँहतोड़ जवाब देते हुए, रात 21:00 पर भारतीय फाइटर एयरक्राफ्ट ने पाकिस्तान कई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। इस मिशन में भारतीय वायुसेना के MiG-21FL के छह स्क्वाड्रन हिस्सा ले रहे थे। MiG-21 हवाई सुरक्षा के साथ साथ दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी, दूसरे एयरक्राफ्ट को कवर करना, दुश्मन के एयरक्राफ्ट को अपनी तरफ लुभाना, आदि काम कर रहे थे। इस युद्ध में MiG-21 का सामना F-104 स्टारफाइटर, F-6s, F-86 सेबर, C-130 हरक्यूलिस जैसे एयरक्राफ्ट से हुआ।
MiG-21 इस युद्ध (लिबरेशन ऑफ बाँग्लादेश) में निर्णायक भूमिका निभाने जा रहा था। 
14 दिसंबर की सुबह, इंटेलिजेंस ने एक संदेश इंटरसेप्ट किया, कि पूर्वी पाकिस्तान में गवर्नमेंट हाउस में नागरिक प्रशासन की एक उच्च-स्तरीय मीटिंग होने वाली हैं। तभी कमांड ने हमला करने का निर्णय लिया। इस मिशन को अंजाम तक पहुँचाने के लिए चार MiG-21 एयरक्राफ्ट ने ढाका की ओर कूच किया। गवर्नर हाउस का पता लगाने के लिए उन्होंने एक पुराने टुरिस्ट मैप का सहारा लिया। आखिरकार वह गवर्नर हाउस ढूढ़ने में कामयाब हो गए, जहाँ मीटिंग चल रही थी। बिना वक्त गवाए MiG-21 के पायलट ने गवर्नर हाउस पर रॉकेट से हमला शुरू कर दिया। इस हमले के तुरंत बाद गवर्नर ए एम मालिक ने इस्तीफा दे दिया। 16 दिसंबर को पाकिस्तान ने अपने लगभग 93000 से ज्यादा सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इस तरह, MiG-21 ने "लिबरेशन ऑफ बांग्लादेश" एक अहम भूमिका निभाई।

वियतनाम युद्ध
वियतनाम युद्ध (Vietnam War) 1 नवंबर, 1955 से लेकर 30 अप्रेल, 1975 के दौरान वियतनाम, लाओस और कंबोडिया में लड़ा गया था. यह युद्ध नॉर्थ वियतनाम और साउथ वियतनाम के बीच लड़ा गया था. यह साम्यवाद (Communism) और पूँजीवाद (Capitalism) के बीच अस्तित्व की लड़ाई थी. करीब 20 सालों तक चले इस युद्ध में 30 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. नॉर्थ वियतनाम को सोवियत यूनियन, चीन, नॉर्थ कोरिया और दुसरे कम्युनिस्ट राष्ट्रों से सहयोग मिल रहा था, दूसरी तरफ साउथ वियतनाम को अमेरिका, थाईलैंड जैसे कम्युनिस्ट विरोधी राष्ट्रों का समर्थन  प्राप्त था. इसमें सबसे मुख्य था अमेरिका, जिसने 1965 में अपनी सेना वियतनाम में भेजी और शुरू हुई एक खूनी जंग..... 

अमेरिका इस युद्ध में अपने 5 लाख से ज्यादा सैनिक उतार चुका था और हवाई युद्ध को प्रमुखता दी थी। 2 मार्च 1965 को अमेरिका ने  "ऑपरेशन रोलिंग थंडर" अभियान चलाया और नॉर्थ विएतनाम के चुने हुए ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी शुरू कर दी। नॉर्थ वियतनाम वायुसेना ने इस हमले के खिलाफ "आसमान में गुरिल्ला जंग" छेड़ दी। MiG-21 ने इसमे एक अहम भूमिका निभाई। वियतनामी वायुसेना के MiG-21 फाइटर "हिट एन रन" रणनीति का उपयोग कर, अमरीकियों को मात दे रहे थे। उन्होंने अनगिनत अमरीकी F-4 फैंटम, F-105 थंडरचीफ़ जैसे एयरक्राफ्ट को मार गिराया, जो की MiG-21 से कही ज्यादा महँगे और एडवांस थे। पूरे नॉर्थ विएतनाम के आसमान में MiG-21 का आतंक था। अमेरिकी वायुसेना ने MiG-21 के इस आतंक को खत्म करने के लिए "ऑपरेशन बोलो" चलाया। जिसका कई MiG-21 शिकार हुए।
30 अप्रैल, 1975 की सुबह नॉर्थ विएतनाम की सेना ने साइगॉन पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही इस युद्ध का अंत हो गया। अमेरिका अपने लगभग 58000 से ज्यादा सैनिक खोकर यह युद्ध हार चुका था।

अरब देशों के लगभग हर युद्ध में इसने दुश्मन को काँटे की टक्कर दी। सोविएत-अफगान युद्ध में इसका बड़े पैमानें पर उपयोग हुआ। तालिबान ने इसका उपयोग गृह युद्ध में अपने विरोधियों पर जमकर किया।

ऑपरेशन डायमंड
MiG-21 की श्रेष्टता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता हैं, कि इजराइल ने इसे हासिल करने के लिए एक ख़ुफ़िया अभियान चलाया था।
1960 के दशक के मध्य में, MiG-21 का इस्तेमाल इजिप्ट, सीरिया और इराकी वायु सेना द्वारा मिडल ईस्ट के संघर्षों में बड़े पैमाने पर किया गया था, खासकर इजरायल बलों के खिलाफ। इजराइल MiG-21 की क्षमता और कमजोरी का विश्लेषण करने के लिए काफी समय से इसे हासिल करने की फ़िराक में था। ताकि इसरायली वायुसेना इसपर सामरिक लाभ प्राप्त कर सके। सोविएत यूनियन MiG-21 को अपने किसी भी दुश्मन को नही देना चाहता था। इजरायल की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी "मोसाद" को एक गुप्त योजना "ऑपरेशन डायमंड" सौंपा गया था। जिसका उद्देश्य MiG-21 को हासिल करना था या यू कहे इसे "चुराना" था। मोसाद ने कई बार कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा। तभी उन्हें एक इराक़ी पायलट मुनीर रेडफा के बारे में पता चला, जो एक ईसाई था। रेडफा इस बात से नाराज़ था कि उसकी ईसाई जड़ो ने सेना में उसकी तरक्की को रोक के रखा हैं। वह इस बात से भी नाराज था कि उसे इराक़ी कुर्द के लोगों पर हमला करने का आदेश दिया गया था। मोसाद के एजेंट ने उससे संपर्क किया और उसे 1 मिलियन अमरीकी डॉलर, इजराइल की नागरिकता, नौकरी पेशकश की गई। रेडफा की शर्त थी कि इराक में उसके सारे रिश्तेदारों को किसी तरह बाहर निकाला जाए। मोसाद ने यह शर्त मान ली और रेडफा के साथ मिलकर मिग को चुराने की योजना बनाई। 16, अगस्त 1966 को रेडफा ने जॉर्डन के हवाई क्षेत्र से होते हुए, अपने MiG-21F-13 को इजराइल के हैटज़ोर एयरफील्ड पर सुरक्षित रूप से उतारा। इसके बाद इसरायली पायलटों ने MiG-21 को अपने मिराज 3 के साथ एक डॉग फाइट में अभ्यास किया। उन्होंने पाया कि मिग एक बेहतर हाई एल्टीट्यूड वाला फाइटर एयरक्राफ्ट था और उड़ान भरने में आसान था। लेकिन उन्होंने यह भी देखा की मिग को डॉग फाइट में सिर्फ कुशल और निपुण पायलट ही जीत दिला सकते हैं। उन्हें मिग की कई कमजोरियों का पता चला। इसरायली वायुसेना ने इसका फायदा उठाया और युद्घ में कई मिग को मार गिराया। बाद में इजराइल ने इसे अमेरिका को सौंप दिया।

26, सितंबर 2025 को MiG-21 ने अंतिम उड़ान भरी और भारतीय वायुसेना से इसे सेवानिवृत्त कर दिया गया।

Sunday, September 20, 2015

शुरू करें कुछ अपना, स्टार्टअप को दें किक स्टार्ट



रुटीन लाइफ की नौकरी पर निकलते वक्त हमेशा आपको लगता है कि 'कुछ' अपना करता तो ज्यादा अच्छा होता। किसी आस-पड़ोस वाले या दोस्त को बिजनस के दम पर दशकों की दौड़ बरसों में पूरा करते देखने पर लगता है कि 'कुछ' अपना करता तो अच्छा होता। यह 'कुछ' करने का आइडिया आपको रात-दिन सोने नहीं दे रहा तो अब वक्त आ चुका है। आंत्रप्रेन्योरशिप की दुनिया में एंट्री मारने को बेताब लोगों को रोड मैप दे रहे हैं अमित मिश्रा:

स्टेप 1 - वॉट इज योर आइडिया
सर जी यह बात भले ही आप कई बार सुन चुके हों कि एक आइडिया आपकी दुनिया बदल सकता है लेकिन है यह सौ फीसदी सच। आप अपने आसपास नजर दौड़ाइए और देखिए किसी एक इंसान की आइडिए ने ही दुनिया बदल रखी है। वह चाहें आपके किचन में सीटी देने वाला कुकर(इसे 20वीं सदी का सबसे बड़ा अविष्कार माना गया है) हो या भारत समेत दुनिया भर में एक नई सोसाइटी खड़ी कर देने वाला फेसबुक, सभी की शुरुआत एक आइडिए से हुई। बरसों से संजोए अपने आइडिए को परवान चढ़ाने से पहले चंद सवाल खुद से पूछें
-क्या मेरी सर्विस या प्रॉडक्ट की वाकई में किसी को जरूरत है?
-क्या इस जरूरत को पूरा करने के लिए शुरू किए बिजनस से आपको फायदा होगा?
-क्या मेरे आइडिए पर पहले से कंपनियां काम कर रही हैं अगर हां तो आप उनसे कैसे बेहतर या अलग हैं।
-क्या आइडिए को जमीन पर लाना प्रैक्टिकल तरीके से संभव है?
-मेरा आइडिया कितना लीगल है?
-क्या यह सेफ है?
-मेरा आइडिया अच्छा तो है लेकिन क्या इसे लोगों तक पहुंचाना मुमकिन है?
-इसे बनाने और इसकी मार्केटिंग में आने वाला खर्च को जुटाना क्या मुमकिन है?
-बिजनस से मुनाफा मिलने की दर इतनी होगी कि मैं सफलता से अपने आइडिए की जमीन पर जमाए रख सकूं?
-अगर बेसिक आइडिया सफल हो गया तो क्या वक्त के हिसाब से इसके और वर्जन निकालना मुमकिन होगा?
-क्या मैं अपने आइडिया को कॉपीराइट या पेटेंट के जरिए सेफ करने की स्थिति में हैं?
-कहीं मेरे आइडिया किसी दूसरे के पेटेंट या कॉपीराइट का उल्लंघन तो नहीं है?
-क्या इसके लिए कच्चा माल और मैन पावर उपलब्ध है?

अगर आपका आइडिया इन कसौटियों पर खरा नहीं उतरता तो कोई गम नहीं मतलब साफ है इसे और रिफाइन करने का वक्त निकलना पड़ेगा। अगर आइडिया फिट है तो अगला स्टेप एक्सपरिएंस सर्वे का आता है।

स्टेप 2 : क्या है एक्सपीरिएंस सर्वे
इसका मतलब है आपने आइडिए से जुड़े प्रफेशनल्स से मिलना चाहिए और उनकी इनसाइट का फायदा उठाना चाहिए। ये लोग आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

इंजीनियर: यह वक्त तकनीक का है और आपके आइडिए से जुड़े इंजीनियर से बेहतर इसके बारे में कोई नहीं बता सकता। उससे बिजनस के तकनीकी पहलू पर राय ले सकते हैं।
सप्लायर: आपके बिजनस आइडिए में कच्चे माल या सर्विसेज में सप्लाई चेन की बड़ी भूमिका है। इसलिए इसकी उपलब्धता और रेट्स की जानकारी लेकर रखना जरूरी है।
एजेंट: कई बार आपके बिजनस आइडिए और उसके कस्टमर के बीच एजेंट की भूमिका अहम होती है। ऐसे में उससे बात करना होगा बेहतर आइडिया।
सरकारी अधिकारी/वकील: इनसे सेफ्टी लाइसेंस, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, लेबलिंग या डिस्क्लेमर से जुड़ी सलाह ले सकते हैं।

इस सबके अलावा आपका आइडिया चाहें जितना भी ओरिजनल क्यों न हो इस बात की गुंजाइश बनी रहती है कि कोई और भी इसे कर रहा हो। इसलिए जितना हो सके रिसर्च कर लें। इसमें इंटरनेट मददगार हो सकता है। मार्केट में कंपिटिशन के बारे में भी रिसर्च जरूरी है। बेहतर होगा कि उनकी प्राइसिंग, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और प्रॉफिट के बारे में अच्छी तरह से जान लें। ऐसा करने में इकॉनॉमिक अफेयर से जुड़े न्यूज पोर्टल, अखबार और मैगजीन आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं।

स्टेप 3 : कंपनी रजिस्ट्रेशन
भारत में किसी भी कंपनी को रजिस्टर्ड करने के लिए बाकायदा मिनस्ट्री ऑफ कार्पोरेट अफेयर काम करती है। भारत में कंपनियां दो स्वरूपों, सोल प्रोप्राइटरशिप और प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह रजिस्टर कराया जा सकता है।

- कंपनी लॉ के अनुसार किसी भी रजिस्टर्ड कंपनी के लिए कम से कम 2 पार्टनर और 2 शेयर होल्डर होना जरूरी है।
- शेयर होल्डर्स किसी भी हाल में 50 से ज्यादा नहीं हो सकते।
- किसी भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में आम पब्लिक शेयर नहीं खरीद सकती है।
- ऑनलाइन रडिस्ट्रेशन के लिए www.mca.gov.in/MCA21/RegisterNewComp.html पर जा सकते हैं।
- सोल प्रोप्राइटरशिप बिजनस करने के लिए किसी कंपनी लॉ के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ता।
- नई कंपनी खोलने का यह आसान और पुराना तरीका है।
- ऐसी कंपनी का बैंक अकाउंट तो कंपनी के नाम पर ही होता है लेकिन उसे ऑपरेट कंपनी का फाउंडर अपने सिग्नेचर से ही करता है।
- इसमें किसी भी तरह के कम से कम या अधिक से अधिक पैसे की लिमिट नहीं होती।
- ऐसी कंपनी की पहचान उसके ओनर से ही होती है और इसके अलावा उसकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती।

स्टेप 4 : फंड का जुगाड़
इतना सब करने के बाद भी एक सचाई का सामना आपको करना पड़ेगा कि आपका बेहतरीन आइडिया अभी कागजों पर ही है। इसे जमीन पर लाने के लिए सबसे जरूरी चीज यानी 'कैपिटल' यानी पैसे। इसके इंतजाम के लिए अनुभवी बिजनसमैन तरीके बताते हैं:

1 - अपना पैसा लगा कर
2- बैंक से लोन लेकर
3 - किसी पार्टनर को फाइनैंसर बना कर या प्राइवेट इक्विटी (हिस्सेदारी) देकर
4 - VC (वेंचर कैपिटलिस्ट) के सहारे कैसे मिलेगा बैंक से लोन
- अपना बिजनस शुरू करने के लिए अगर आपको बैंक लोन लेना है तो कंपनी लॉ के तहत रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है।
- इसके बाद कंपनी को मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज से अप्रूवल लेना होगा। यह तब ही मिलेगा जब इस मिनिस्ट्री की गाइडलाइन पर आप खरे उतरेंगे। इसकी पूरी जानकारी के लिए आप dcmsme.gov.in पर जाकर ले सकते हैं।
- एक बार यहां से अप्रूव हो जाने के बाद बैंक 1 करोड़ तक का लोन बिना कुछ गिरवी रखे दे सकता है।
- बैंक लोन देते वक्त खाता खुलवाते वक्त की गई औपचारिकताओं के अलावा बिजनस की प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी मांगती है।
- अगर प्रोडक्शन से जुड़ा बिजनस शुरू करते हैं तो पॉल्यूशन और लेबर मिनिस्ट्री से मिलने वाली एनओसी भी देनी पड़ती है।
- अगर कंपनी सोल प्रोप्राइटरशिप (केवल एक इंसान द्वारा चलाई जा रही) वाली है या शुरू करने के लिए पैसा चाहती है तो उसे स्टेट लेवल पर चलने वाले डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज से संपर्क करना होता है। हर स्टेट में इनके लिए अलग-अलग मापदंड रखे गए हैं।

प्राइवेट इक्विटी का जोर या वेंचर कैपिटलिस्ट की ओर किसी भी आइडिया को उड़ान देने के लिए जरूरी है कि फंडिंग के फंडे को पूरी तरह से समझा जाए। बैंक से लोन लेकर बिजनस करने का पारंपरिक तरीका अब यूथ को उतना पसंद नहीं आ रहा जितना प्राइवेट इक्विटी या वेंचर कैपिटलिस्ट के जरिए बिजनस शुरू करके आ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि लोन लेकर बिजनस करने में सारा दरोमदार आप पर आ जाता है जबिक वेंचर कैपिटलिस्ट आइजिएशन से लेकर एक्सपर्ट एडवाइस तक देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। वैसे देखा जाए तो वेंचर कैपिटलिस्ट और प्राइवेट इक्विटी बिजनस के लिए पैसा जुटाने का मिलता जुलता ही तरीका है जिसमें आपके आइडिया के पीछे पैसा लगाने के बदले आपको प्रॉफिट शेयर करना होता है। लेकिन कुछ अंतर हैं तो प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटलिस्ट को अलग-अलग करते हैं।

प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर

-यह अक्सर पहले से कमाई करने वाली कंपनी या घाटे में चल रही कंपनियों पर पैसा लगाना चाहते हैं।
-यह हर तरह की कंपनियों पर पैसा लगाती हैं और मुनाफा को ही महत्व देते हैं।
-ये बड़ी फंडिंग के लिए आराम से तैयार हो जाती हैं। बिजनस मॉडल और साइज के हिसाब से इन्वेस्मेंट की रकम तय करते हैं।
-कम से कम 6 से 10 साल तक में पूरी फंडिंग करती हैं।
-अक्सर कंपनी पर पूरा कंट्रोल रखती हैं और बड़े शेयर की डिमांड करते हैं।
-इन्वेस्ट कंपनी के रोजमर्रा के काम में ज्यादा एक्टिव नहीं रहते जब तक कि कंपनी पॉलिसी के लेवल पर कोई भारी बदलाव न करना चाहे। वेंचर कैपिटलिस्ट
-किसी आइडिया को बिजनस की शक्ल देने की शुरुआत में ही वेंचर कैपिटलिस्ट का बड़ा रोल होता है। कम पूंजी से शुरू किए गए बिजनस को अक्सर इनसे फायदा होता है।
-इस तरह की फंडिंग अक्सर हाई ग्रोथ सेक्टर वाले बिजनस जैसे आईटी, बायोमेडिकल और अल्टरनेच एनर्जी आदि सेक्टर में ज्यादा होती है।
-छोटे इन्वेस्टमेंट के लिए ही तैयार होती हैं। अक्सर वेंचर कैपिटलिस्ट 10 लाख रुपये तक की रकम ही फंड करते हैं।
-फंडिंग पीरियड 4 से लेकर 7 साल का होता है।
-वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनी में अक्सर छोटे शेयर ही लेती हैं लेकिन शर्तें आइडिया देने वाले और कंपनी के बीच तय होती हैं।
-इन्वेस्टर हर मुकाम पर राय देते हैं और अपने कनेक्शन और डिस्ट्रिब्यूशन सर्कल का भी फायदा देते हैं।

स्टेप 5 - प्लान होना चाहिए दमदार
अपने बिजनस के जमीन पर लाने के लिए जरूरी है एक बिजनस प्लान। यह प्लान वह दस्तावेज है यह दिखाता है कि आप कितनी गहराई से अपने बिजनस को समझते हैं और यही इन्वेस्टर को आपकी ओर आकर्षित करेगा।

बिजनस प्लान के मुख्य फीचर्स होते हैं:
बिजनस डिटेल्स:
1-नाम
2-लोकेशन
3-प्रॉडक्ट
4-मार्केट और कॉम्पिटिशन
5-मैनेजमेंट का अनुभव (किसी भी तरह का)
-बिजनस से आप क्या पाना चाहते हैं और कैसे पाना चाहते हैं इसके बारे में भी एक नोट लिखें।
-कितने फंड की जरूरत है फंड के लिए एप्लीकेशन

मार्केट अनैलेसिस:
1-अपने प्रॉडक्ट से जुड़ी पूरी मार्केट का ब्योरा
2-इंडस्ट्री के ट्रेंड की जानकारी
3-टारगेट मार्केट क्या है?

प्रॉडक्ट या सर्विस:
1-प्रॉडक्ट या सर्विस लाइन का पूरा ब्यौरा
2-पेटेंट, कॉपीराइट और लीगल इश्यू

मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस (अगर है तो):
1-मैटीरियल
2-कच्चे माल की सप्लाई का ब्यौरा
3-प्रॉडक्शन का तरीका

मार्केटिंग की रणनीति:
1-किन तरीकों से होगी मार्केटिंग
2-प्रॉडक्ट या सर्विस की कीमत कितनी होगी
3-प्रॉडक्ट या सर्विस बेचने का कौन सा तरीका आजमाएंगे

मैनेजमेंट प्लान:
1-किस तरह का ऑफिस ऑर्गेनाइजेशन स्ट्रक्चर आपनाएंगे
2-बोर्ड ऑफ डायरेक्टर या ओनरशिप किसके पास होगी
3-कामों की जिम्मेदारी किस पर कौन सी होगी
4-स्टाफ प्लान या कितने कर्मचारी होंगे

5-अगले एक या दो साल तक बिजनस चलाने का ऑपरेशनल प्लान

इनक्यूबेटर और एसेलरेटर को भी समझें
बिजनस की शुरुआत करने वालों के लिए इन दो शब्दों के मायने जानना बहुत जरूरी हैं। इन्क्यूबेटर आपको अपने आइडिया के शुरुआती दौर में उसे प्रॉडक्ट के लेवल तक ले जाने में मदद करता है। इस दौरान वह एक्सपर्ट सलाह तो देता ही है साथ ही पूरे आइडिया को फाइन ट्यून करने का काम भी करता है। एसेलरेटर, जैसा कि नाम से ही पता चलता है आपके आइडिया को स्पीड देने का काम करता है। इनका रोल तब अधिक होता है जब एक बिजनस आइडिया चल तो निकला है लेकिन बड़ा बनने में कुछ कसर बाकी है। यह तय वक्त के लिए आपके बिजनस आइडिया को अपने सहारे ऊंची उड़ान दिलाने में मदद करते हैं। इन्क्यूबेटर और एसेलरेटर अमूमन नए बिजनस आइडिया को एक ऑफिस स्पेस के साथ ही एक्सपर्ट्स की मदद भी दिलाते हैं।ये दोनो ही बेहतरीन आइडिया को हर मुकाम पर पालने पोसने की जिम्मेदारी उठाते हैं ।

यहां से मिलेगी आपको मदद
हम कुछ ऐसे ठिकानों के बारे में दे रहे हैं जो आपके आइडिया को एक मुकाम देने का काम कर सकते हैं।

इंडियन एंजल नेटवर्क इनक्यूबेटर
दिल्ली भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉल्जी का चलाया गया यह बेहतरीन आंत्रप्रेन्योरशिप प्रोग्राम है जिसमें आइडिया को बेहतरीन तरीके से सपोर्ट किया जाता है। यहां किसी भी वेंचर को 18-24 महीने तक इनक्यूबेट किया जाता है। एक्सपर्ट्स का इनसे बढ़िया नेटवर्क फिलहाल भारत में मौजूद नहीं है।

टेक्नॉलजी बिजनस इन्क्यूबेटर
आईआईटी दिल्ली हालांकि यह केवल तकनीकी बिजनस को ही बढ़ाने में मदद करते हैं लेकिन इनके सहारे कई आईआईटी स्टूडेंट्स ने अपने आइडिया को बड़ा बनाया है। इसमें आईआईटी किसी भी अच्छे बिजनस आइडिया को वेंचर कैपिटलिस्ट की मदद से आगे बढ़ाती है। एक्सपर्ट्स के लिहाज से यह किसी भी आइडिया को शुरू करने के लिए अच्छी जगह साबित हो सकती है।

टीलैब्स
दिल्ली यह टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड का एक एसेलेरेटर है जो 10 फीसदी हिस्सेदारी के बदले 10 लाख रुपये तक फंड करता है। 13 महीने का इस प्रोग्राम को बिजनस जगत की बड़ी हस्तियां मेंटर करती हैं। यह ऑफिस के लिए जगह भी देते हैं। प्रोग्राम की शुरुआत फरवरी और अगस्त में होती है।

सोसाइटी फॉर इनोवेशन ऐंड आंत्रप्रेन्योरशिप, आईआईटी मुंबई
साइंस और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में एंटप्रेन्योरशिप के लेवल पर चलने वाली किसी भी रिसर्च या शुरुआत को आईआईटी मुंबई का यह हिस्सा बखूबी करता है। इसे भी सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नॉल्जी का सपोर्ट मिलता है। हालांकि यहां केवल आईआईटी मुंबई से जुड़े स्टूडेंट्स को ही मौका मिल पाता है।

अनलिमिटेड इंडिया (UnLtd) मुंबई
यह सोशल आंत्रप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिहाज से बेहतरीन इनवेस्टर साबित हो सकता है। यहां एक्सपर्ट्स की देखरेख में बेहतरीन स्टार्टअप इनक्यूबेशन के साथ-साथ सीड फंडिंग (बिजनस शुरु करने के लिए पैसा) का जुगाड़ भी हो जाता है। 3 टियर की फंडिग में 80 हजार से 20 लाख तक की फंडिंग हो सकती है।

सिडबी इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर, आईआईटी कानपुर
छोटी इंडस्ट्रीज को मदद करने के लिहाज से आईआईटी कानपुर का यह प्रोग्राम काफी खास है जो स्मॉल इडस्ट्रीज डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट के सहयोग से चल रहा है। यह न केवल टेक्नॉल्जी बेस आइडिया को सपोर्ट करता है बल्कि उन्हें बड़े बिजनस की शक्ल देने के लिहाज से सपोर्ट भी करता है। छोटे लेवल के बिजनस आइडिया के लिहाज से इस सेंटर को एक्सपर्ट माना जाता है। 

नवभारत टाइम्स के सौंजन्य से:
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